Anant chaturdashi 2025: अनंत चतुर्दशी कब है, नोट कर लें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, व्रत कथा और आरती
Anant chaturdashi 2025: हिंदू धर्म में भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि का विशेष महत्व है. इस दिन अनंत चतुर्दशी व्रत रखा जाता है और भगवान विष्णु की उपासना की जाती है. धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत को करने से परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है और जीवन की परेशानियां दूर होती हैं. यही नहीं, इस दिन गणेशोत्सव का समापन भी होता है और श्रद्धालु गणपति बप्पा का विसर्जन करते हैं. ऐसे में आइए जानते हैं कि इस साल अनंत चतुर्दशी का व्रत कब रखा जाएगा. पूजन के लिए शुभ मुहूर्त, विधि, व्रत कथा और आरती क्या है.
अनंत चतुर्दशी 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त
- व्रत तिथि प्रारंभ- 5 सितंबर 2025, शुक्रवार, सुबह 05:26 बजे
- व्रत तिथि समाप्त- 6 सितंबर 2025, शनिवार, सुबह 06:12 बजे
- पूजन का उत्तम मुहूर्त- 5 सितंबर 2025 को प्रातः 09:15 से 11:45 बजे तक
- इस दिन व्रत का पालन और पूजन शुभ मुहूर्त में करना सर्वोत्तम माना गया है।
अनंत चतुर्दशी व्रत और पूजा विधि
व्रती को प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करना चाहिए।
पूजा स्थान पर भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
कलश स्थापना करके श्रीहरि का आह्वान करें।
एक धागे में 14 गांठें लगाकर हल्दी और केसर से रंगकर अनंत सूत्र तैयार करें।
भगवान विष्णु की पूजा फूल, दीप, धूप, फल और पंचामृत से करें।
पूजा पूर्ण होने के बाद पुरुष अपने दाहिने हाथ में और महिलाएं बाएं हाथ में अनंत सूत्र बांधें।
दिनभर व्रत का पालन करें और संध्या समय भगवान विष्णु की आरती करें।
व्रत के अंत में ब्राह्मण या जरूरतमंद को भोजन व दान देना शुभ माना जाता है।
अनंत चतुर्दशी व्रत कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, जब धर्मराज युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से जीवन में समृद्धि बनाए रखने का उपाय पूछा, तब उन्होंने अनंत चतुर्दशी व्रत का महत्व बताया। कहा जाता है कि एक ब्राह्मण की पत्नी सुसिला ने यह व्रत श्रद्धा भाव से किया और अपने हाथ में अनंत सूत्र बांधा। इसके प्रभाव से उनके परिवार में सुख-समृद्धि आई। लेकिन उसके पति ने इस सूत्र को साधारण धागा समझकर त्याग दिया। इसके बाद उनके जीवन में कठिनाइयां आने लगीं। बाद में सत्य का बोध होने पर उन्होंने पुनः व्रत किया और भगवान विष्णु की कृपा से उनका जीवन खुशहाल हो गया।
व्रत-कथा से क्या मिलती है सीख
इस कथा से यह संदेश मिलता है कि अनंत सूत्र को कभी भी तुच्छ नहीं समझना चाहिए और पूरे विश्वास के साथ व्रत करना चाहिए।
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अनंत चतुर्दशी की आरती (भगवान विष्णु)
आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की
गले में बैजंती माला, बजावै मुरली मधुर बाला।
श्रवण में कुण्डल झलकाला, नंद के आनंद नंदलाला।
गगन सम अंग कांति काली, राधिका चमक रही आली।
लतन में ठाढ़े बनमाली; भ्रमर सी अलक, कस्तूरी तिलक,
चन्द्र सी झलक; ललित छवि श्यामा प्यारी की।
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की॥
आरती कुंजबिहारी की
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥ ...
कनकमय मोर मुकुट बिलसै, देवता दरसन को तरसैं।
गगन सों सुमन रासि बरसै; बजे मुरचंग, मधुर मिरदंग,
ग्वालिन संग; अतुल रति गोप कुमारी की।
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की॥
आरती कुंजबिहारी की
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥ ...
जहां ते प्रकट भई गंगा, कलुष कलि हारिणि श्रीगंगा।
स्मरन ते होत मोह भंगा; बसी सिव सीस, जटा के बीच,
हरै अघ कीच; चरन छवि श्रीबनवारी की।
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की॥
आरती कुंजबिहारी की
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥ ...
चमकती उज्ज्वल तट रेनू, बज रही वृंदावन बेनू।
चहुं दिसि गोपि ग्वाल धेनू; हंसत मृदु मंद, चांदनी चंद,
कटत भव फंद; टेर सुन दीन भिखारी की।
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की॥
आरती कुंजबिहारी की
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥ ...
आरती कुंजबिहारी की
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥ ...
व्रत का महत्व
इस व्रत से जीवन में धन, ऐश्वर्य और समृद्धि आती है। परिवार में शांति और सौहार्द बना रहता है। इस दिन गणपति विसर्जन होने के कारण धार्मिक दृष्टि से यह तिथि और भी पावन मानी जाती है।
Reviewed by News Astro Aaptak
on
Thursday, September 04, 2025
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